पर्व और त्योहार

क्यों मनाएं चैत्र नवरात्रि

Sunday, March 26, 2017 18:30 PM

चैत्र शुक्ल पक्ष  के नवरात्रों के साथ ही हिंदु नवसंवत्सर शुरू हो जाता हैं। जिसकी शुरुआत 28 मार्च से होगा। चैत्र महीने में आने वाले नवरात्रें को वार्षिक नवरात्रा भी कहा जाता हैं। नौ दिन तक मां दुर्गा के नौ स्वरूप की होने वाली यह आराधना साल के दो पखवाड़ों में अहम होते हैं। एक आराधना को चैत्र माह की और दूसरी शारदीय नवरात्र जो अश्विन माह में मनाया जाता हैं। 28 मार्च से शुरू होने वाले यह चैत्र नवरात्र पांच अप्रेल तक चलेंगे। 

अमावस्यायुक्त प्रतिपदा में न करें घटस्थापना,
 
श्री विक्रमी संवत् 2074 शके 1939 चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 29 मार्च, बुधवार को ही मनाएं व घटस्थापना करें, 28 मार्च को अमावस्या है। अमावस्यायुक्त प्रतिपदा घटस्थापना अच्छी नहीं मानी गई है।  

'अमायुवता न कर्तव्या प्रतिपत पूजनेमम' (देवी भागवत में कहा गया है।) 

प्रतिपदा 'सम्मुखी' शुभ मानी गई है।  

'प्रतीपत्सम्मुखी सम्मुखी कार्या या भवेदपराहिकी' (स्कंदपुराण का मत है)
  
प्रतिपदा से द्वितीया 29 मार्च को है अत: घटस्थापना 29 मार्च को ही करें।

चैत्र नवरात्रि मंगलवार, 28 मार्च 2017 को घटस्थापना हेतु उत्तम समय इस प्रकार है।
 
लाभ का चौघड़िया प्रात: 11.00 बजे से 12.32 बजे तक है। 

इस समयावधि में विजय मुहूर्त 12.20 से 12.44 तक है अत: यह समय घटस्थापना हेतु अत्यंत उत्तम है।  

इसके बाद अमृत के चौघड़िया में 12.32 से 14.04 तक का समय शुभकारी है। यह समय भी घटस्थापना हेतु उत्तम रहता है।  

अधिकांश लोग इसी समयावधि में घटस्थापना करते हैं। राहुकाल 15.00 बजे से लेकर 16.30 बजे तक रहेगा और इसी समयावधि में शुभ का चौघड़िया है लेकिन राहुकाल की वजह से इस समय घटस्थापना नहीं होगी अत: समय नहीं दिया जा रहा है।