आध्यात्मिकता

रोज ध्यान करने से मन होता है शांत और मिलते हैं ये फायदे

Sunday, March 26, 2017 20:50 PM

संसार में बहुत कुछ होता नहीं है लेकिन, लगने लगता है। कभी-कभी लगता है जो पहले हमारे बड़े शुभचिंतक थे, आजकल बदल से गए हैं। ऐसा लगता है, हो सकता है वैसा होता नहीं हो। माता-पिता जब बेटे की शादी करते हैं तो कई बार लगता है बहू आने के बाद बेटा बदल गया। हो सकता है, ऐसा होता न हो। विवाह के बाद स्त्री ससुराल जाती है तो वहां का नया माहौल, नए रिश्तेदार देखकर उसे लगता है ये मेरे मायके जैसे नहीं हैं।

जो माहौल मुझे वहां मिला, यहां नहीं मिल रहा। फिर ऐसा लगता है होता नहीं है वाली बात। ये लगने का नतीजा यह होता है कि अचानक अनजानी-सी उदासी भीतर उतरने लगती है। इसका आकलन करना बड़ा मुश्किल है कि जो लग रहा है, सचमुच वैसा हो भी रहा है या नहीं। इसका कोई फॉर्मूला नहीं है, जिससे आप पता लगा सकें कि जो लग रहा है वह सही है या जो हो रहा है वह सही होगा।

जो लोग मेडिटेशन करेंगे उन्हें थोड़ी बहुत भनक मिल सकती है, क्योंकि मेडिटेशन करने वाला मन पर काम करता है और मन की आदत है कि वह अपनी गलत सोच को बुद्धि पर थोप देता है। मन को विपरीत सोचना, संदेह करना ही पसंद है। इसलिए आपको जो विपरीत लग रहा है, संभव है मन का थोपा हुआ हो। बस, यहीं से परेशानी शुरू होती है। जब ध्यान में मन पर काम करते हैं तो थोपा हुआ खेल खत्म हो जाता है, हम बुद्धि और हृदय से सोचने लगते हैं।

इन दोनों से जो भी देखेंगे वह सही होगा। इसलिए योग का संबंध केवल धर्म-कर्म, परमात्मा की प्राप्ति या मोक्ष से नहीं है। इसका संबंध है आपकी सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाना। ध्यान के बाद आप कभी भी, कैसी भी स्थिति में ‘ऐसा लग रहा है’ को लेकर निराश या उदास नहीं होंगे। आपको वह दिखने लगेगा जो सही और सचमुच आपके लिए घट रहा होगा।