निम्बार्क सम्प्रदाय

निम्बार्काचार्य का भक्तिपरक मत

महर्षि पतंजलि ने अष्टांग योग और ईश्वर प्रणिधान- ये दो मार्ग आत्मोद्धार के लिए निर्दिष्ट किये थे। निम्बार्क ने इन तीनों मार्गों को दो मार्ग न कह करके इनके सहभाव से सम्पन्न भक्ति योग का प्रवर्तन किया, जिसमें चिदानन्द सम्बलित प्रेमभाव का प्राधान्य है।

12 Apr 17:35 PM

द्वैताद्वैतवाद का तुलनात्मक विश्लेषण

ईश्वर एवं धर्मतत्त्व के द्वारा विवेक, वैराग्य, शम, दम, तितिक्षा और उपरति आदि छ: साधनों के बाद ब्रह्म तत्त्व की जिज्ञासा होती है। निम्बार्क के मत में ब्रह्म जगत का उपादान कारण और निमित्त कारण है। इसीलिए भिन्न भी है और अभिन्न भी। जगत ब्रह्म की स्थूल अभिव्यक्ति है।

12 Apr 17:30 PM

निम्बार्काचार्य के सिद्धांत

आचार्य निम्बार्क के अनुसार ब्रह्म जीव और जगत से पृथक भी है और अपृथक भी। परिणाम के रूप में वे पृथक हैं, किन्तु स्वरूप में अन्तर न होने के कारण वे ब्रह्म से अपृथक भी हैं। ब्रह्म जगत रूप में परिणत होने पर निर्विकार है।

12 Apr 17:25 PM

महाराज जी

निम्बार्क संप्रदाय के मुर्धन्य सन्त परम वीत् राग, तपोमुति रसिक शरोमणी, गुरुवर्य अनंत श्री विभूषित सन्गीताचार्य श्री श्री 108 श्री शुकदेव दास महाराज जी निम्बार्क सम्प्रदाय के 53 वें आचार्य थे

03 Apr 14:45 PM

श्री निम्बार्क सम्प्रदाय

वैष्णवों के प्रमुख चार सम्प्रदायों में निम्बार्क सम्प्रदाय भी एक है। इसको 'सनकादिक सम्प्रदाय' भी कहा जाता है।

26 Mar 22:20 PM

श्री निम्बार्कचार्य पीठ के महत्वपूर्ण त्योहार

श्री निम्बार्कचार्य पीठ के महत्वपूर्ण त्योहार

26 Mar 22:15 PM

श्री निम्बार्कचार्य पीठ

श्री निम्बार्कचार्य पीठ

26 Mar 21:50 PM

निम्बार्क सम्प्रदाय के तिलक

निम्बार्क सम्प्रदाय के तिलक

26 Mar 21:50 PM

निम्बार्क सम्प्रदाय के दैनिक मंत्र

निम्बार्क सम्प्रदाय के दैनिक मंत्र

26 Mar 21:45 PM

निम्बार्क सम्प्रदाय के नियम

निम्बार्क सम्प्रदाय के नियम

26 Mar 21:15 PM